हनुमान आरती (श्लोक 13)
हनुमान आरती श्लोक 13 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
श्लोक
लंका विध्वंस किये रघुराई।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई।।
भावार्थ
इस श्लोक का भाव है कि भगवान श्रीराम (रघुराई) ने अपने परम भक्त हनुमान जी की सहायता से रावण की लंका का विध्वंस किया। इस महान कार्य की कीर्ति को गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपनी वाणी में गाया और उसका गुणगान किया।
विस्तृत विवेचन
लंका विध्वंस किये रघुराई
श्रीराम ने रावण का वध कर सम्पूर्ण लंका को राक्षसों सहित नष्ट कर दिया। इस कार्य में हनुमान जी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही—उन्होंने लंका में प्रवेश कर, माता सीता की खोज की, लंका को जलाया, असुरों का संहार किया और राम-कार्य को सफल बनाया। लंका का विध्वंस केवल भौतिक रूप से नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक भी है।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई
गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीराम और हनुमान जी के इन महान कार्यों का गुणगान किया और अपनी रचनाओं में उनकी महिमा का विस्तार से वर्णन किया। तुलसीदास जी के अनुसार, श्रीराम और हनुमान जी की कथा केवल वीरता की नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और धर्म की भी है।
सारांश
यह श्लोक हनुमान जी की आरती का अंतिम भाग है, जिसमें श्रीराम और हनुमान जी के अद्भुत कार्यों का स्मरण कर तुलसीदास जी द्वारा उनकी कीर्ति का गान किया गया है। यह भक्तों को प्रेरित करता है कि वे भी भक्ति, सेवा और धर्म के पथ पर चलें।
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