हनुमान आरती (श्लोक 2)
हनुमान आरती श्लोक 2 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
श्लोक:
"जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।"
यह श्लोक हनुमान जी की आरती का एक अंश है, जिसमें उनके अद्भुत पराक्रम, शक्ति और कृपा का वर्णन किया गया है। आइए इसका भावार्थ और विस्तृत विवेचन करें—
शब्दार्थ
जाके बल से: जिसकी शक्ति के कारण
गिरिवर: बड़े-बड़े पर्वत
कांपे: कांपते हैं
रोग दोष: शारीरिक व मानसिक रोग तथा सभी प्रकार के दोष
निकट न झांके: पास भी नहीं फटकते
भावार्थ
जिसके बल से बड़े-बड़े पर्वत भी कांप उठते हैं, और जिसके समीप रोग व दोष कभी नहीं आ सकते, ऐसे महाबली हनुमान जी की महिमा अपरंपार है। उनके अनुग्रह से भक्तों के सभी रोग, कष्ट और दोष दूर हो जाते हैं।
विस्तृत विवेचन
1. हनुमान जी की शक्ति
हनुमान जी को 'बजरंगबली' भी कहा जाता है, अर्थात् जिनका शरीर वज्र के समान कठोर और शक्तिशाली है। वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस आदि ग्रंथों में हनुमान जी की अद्भुत शक्ति का वर्णन मिलता है।
जब लक्ष्मण जी मूर्छित हो जाते हैं, तब हनुमान जी संजीवनी पर्वत को ही उठा लाते हैं।
उनके बल से पर्वत, राक्षस, यहाँ तक कि समुद्र भी कांप उठता है।
2. रोग और दोषों का नाश
हनुमान जी को संकटमोचन कहा गया है।
उनकी कृपा से शारीरिक रोग, मानसिक चिंता, भय, भूत-प्रेत बाधा, ग्रह दोष आदि दूर हो जाते हैं।
भक्तों का विश्वास है कि हनुमान जी का स्मरण करने से सभी प्रकार के कष्ट, रोग और दोष नष्ट हो जाते हैं।
3. भक्तों के लिए संदेश
यह श्लोक यह भी संकेत देता है कि यदि हम सच्चे मन से हनुमान जी का स्मरण करें, उनके गुणों का ध्यान करें, तो हमारे जीवन के बड़े से बड़े संकट भी दूर हो सकते हैं।
हनुमान जी की आराधना से मनुष्य में भी साहस, बल, स्वास्थ्य और निडरता का संचार होता है।
निष्कर्ष
इस श्लोक के माध्यम से भक्तों को यह प्रेरणा मिलती है कि हनुमान जी की भक्ति से जीवन के सभी संकट, रोग और दोष दूर हो सकते हैं। उनकी शक्ति इतनी अपार है कि बड़े-बड़े पर्वत भी उनके सामने कांप जाते हैं। अतः हमें भी हनुमान जी के चरणों में श्रद्धा और विश्वास रखते हुए उनका स्मरण करना चाहिए।
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