हनुमान आरती (श्लोक 12)

 हनुमान आरती श्लोक 12 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

श्लोक:

जो हनुमान (जी) की आरती गावै।

बसि बैकुंठ परम पद पावै।।

भावार्थ

जो भी व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से श्री हनुमान जी की आरती गाता है, वह बैकुंठ (भगवान विष्णु का दिव्य लोक) में निवास करता है और परम पद (मोक्ष, सर्वोच्च स्थिति) को प्राप्त करता है।

विस्तृत विवेचन

1. आरती का महत्व

आरती का अर्थ है—प्रेम, श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान की स्तुति करना। आरती में दीप, धूप, फूल आदि से भगवान की पूजा की जाती है। यह भक्त और भगवान के बीच एक सेतु का कार्य करती है, जिससे भक्त की भावनाएँ सीधे भगवान तक पहुँचती हैं।

2. श्री हनुमान जी की महिमा

हनुमान जी को संकटमोचन, भक्तों के रक्षक और परम भक्त के रूप में जाना जाता है। वे भगवान राम के अनन्य सेवक हैं और अपने भक्तों की सभी प्रकार की बाधाएँ दूर करते हैं। उनकी आरती गाने से मन, वचन और कर्म शुद्ध होते हैं।

3. 'बैकुंठ' और 'परम पद' का अर्थ

बैकुंठ: यह भगवान विष्णु का दिव्य धाम है, जहाँ केवल पुण्यात्माएँ और परम भक्त ही जा सकते हैं।

परम पद: इसका अर्थ है मोक्ष या आत्मा की परम शांति की अवस्था, जहाँ जन्म-मरण का चक्र समाप्त हो जाता है।

4. श्लोक का संदेश

श्लोक में कहा गया है कि जो भी व्यक्ति हनुमान जी की आरती भक्ति-भाव से करता है, उसे न केवल सांसारिक सुख-शांति मिलती है, बल्कि उसे मोक्ष (परम पद) की प्राप्ति भी होती है। अर्थात्, हनुमान जी की आरती गाने से जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं और अंत में आत्मा को परम शांति मिलती है।

5. आध्यात्मिक दृष्टि से

यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से भगवान की आराधना करने पर जीवन में उच्चतम लक्ष्य (मोक्ष) प्राप्त किया जा सकता है। आरती केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार है, जो भगवान तक पहुँचती है।

निष्कर्ष

"जो हनुमान (जी) की आरती गावै, बसि बैकुंठ परम पद पावै"—इस श्लोक में हनुमान जी की आराधना की महिमा का सुंदर वर्णन है। यह श्लोक भक्तों को प्रेरित करता है कि वे श्रद्धा और भक्ति से हनुमान जी की आरती करें, जिससे उन्हें सांसारिक सुख के साथ-साथ परम शांति (मोक्ष) की प्राप्ति भी हो सके।

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