हनुमत स्तवन (श्लोक 1)

 हनुमत स्तवन श्लोक 1 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

श्लोक

प्रनवऊं पवन कुमार खल बन पावक ग्यान घन।

जासु हृदय आगार बसहि राम सर चाप धर।।

भावार्थ

मैं पवनपुत्र (हनुमान जी) को प्रणाम करता हूँ, जो दुष्टों के वन (समूह) में अग्नि के समान हैं और ज्ञान के मेघ (घन) हैं। जिनके हृदय रूपी घर में श्रीराम, धनुष और बाण धारण किए हुए, निवास करते हैं।

विस्तृत विवेचन

1. प्रनवऊं पवन कुमार

प्रनवऊं का अर्थ है 'मैं प्रणाम करता हूँ' या 'नमन करता हूँ'।

पवन कुमार हनुमान जी का एक प्रिय नाम है, जिसका अर्थ है 'पवन के पुत्र'। पवन (वायु) देवता के पुत्र होने के कारण हनुमान जी को यह नाम मिला।

2. खल बन पावक

खल का अर्थ है 'दुष्ट', 'पापी' या 'अधर्मी'।

वन का अर्थ है 'जंगल' या 'समूह'।

पावक का अर्थ है 'अग्नि'।

इसका तात्पर्य है कि हनुमान जी दुष्टों के समूह में अग्नि के समान हैं, अर्थात् जैसे जंगल में आग लगने पर सब कुछ भस्म हो जाता है, वैसे ही हनुमान जी दुष्टों का नाश करने में समर्थ हैं।

3. ग्यान घन

ग्यान का अर्थ है 'ज्ञान'।

घन का अर्थ है 'मेघ' या 'बादल'।

यह उपमा बताती है कि हनुमान जी ज्ञान के मेघ हैं, अर्थात् उनमें अपार और घना ज्ञान समाया हुआ है। वे विद्या, बुद्धि और विवेक के भंडार हैं।

4. जासु हृदय आगार बसहि राम सर चाप धर

जासु = जिनके

हृदय आगार = हृदय रूपी घर में

बसहि = निवास करते हैं

राम सर चाप धर = श्रीराम, जो बाण और धनुष धारण किए हुए हैं

इस पंक्ति का भाव है कि हनुमान जी के हृदय में श्रीराम सशस्त्र रूप में (धनुष-बाण सहित) निवास करते हैं। इसका अर्थ यह भी है कि हनुमान जी के मन में श्रीराम का स्थायी वास है और वे सदा श्रीराम की सेवा में तत्पर रहते हैं।

सारांश एवं महत्व

इस श्लोक में कवि ने हनुमान जी के तीन प्रमुख गुणों का उल्लेख किया है:

दुष्टों का संहारक — वे बुराइयों और पापियों के लिए विनाशकारी अग्नि हैं।

ज्ञान के भंडार — वे अपार ज्ञान, विवेक और बुद्धि के प्रतीक हैं।

रामभक्ति की पराकाष्ठा — उनके हृदय में श्रीराम का स्थायी निवास है, जिससे वे सच्चे भक्त एवं सेवक हैं।

यह श्लोक भक्तों को यह संदेश देता है कि यदि हम भी हनुमान जी की तरह अपने हृदय में प्रभु श्रीराम (या अपने आराध्य) को स्थान दें, तो हम भी ज्ञान, शक्ति और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर हो सकते हैं। साथ ही, बुराइयों का नाश और सद्गुणों की प्राप्ति संभव है।

निष्कर्ष

हनुमान जी की स्तुति करते हुए यह श्लोक उनकी शक्ति, ज्ञान और भक्ति का सुंदर चित्रण करता है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने जीवन में बुराइयों का नाश करें, ज्ञान अर्जित करें और अपने आराध्य को हृदय में बसाएँ।

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