हनुमान आरती (श्लोक 6)
हनुमान आरती श्लोक 6 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
श्लोक
लंका जारी असुर संहारे।
सिया राम जी के काज संवारे।।
यह श्लोक हनुमान जी की आरती का एक महत्वपूर्ण अंश है। इसमें हनुमान जी की वीरता, भक्ति और श्रीराम-सीता के प्रति उनकी निष्ठा का सुंदर वर्णन किया गया है।
शब्दार्थ
लंका जारी: लंका को जलाया (हनुमान जी ने)
असुर संहारे: असुरों (राक्षसों) का संहार किया
सिया राम जी के काज संवारे: सीता-राम जी के कार्य को सफल बनाया, उनके कार्य को सुलझाया
भावार्थ
हनुमान जी ने श्रीराम के कार्य को सिद्ध करने के लिए लंका (रावण की नगरी) को जलाया और राक्षसों का संहार किया। उन्होंने सीता माता की खोज कर श्रीराम को समाचार दिया और लंका में जाकर अपनी बुद्धि, बल और पराक्रम से श्रीराम के कार्य को सफल बनाया।
विस्तृत विवेचन
1. लंका जारी
हनुमान जी जब सीता माता की खोज में लंका पहुंचे, तब रावण की आज्ञा से उनकी पूंछ में आग लगा दी गई। हनुमान जी ने अपनी शक्ति और चतुराई से उस आग का उपयोग लंका को जलाने में किया। इससे रावण और उसकी सेना में हड़कंप मच गया। यह घटना हनुमान जी की वीरता, साहस और बुद्धिमत्ता का परिचायक है।
2. असुर संहारे
हनुमान जी ने लंका में अनेक असुरों (राक्षसों) का संहार किया। उन्होंने अक्षय कुमार, लंकिनी आदि राक्षसों का वध किया। युद्ध के समय भी हनुमान जी ने असंख्य राक्षसों का नाश किया। यह उनकी शक्ति और धर्म के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।
3. सिया राम जी के काज संवारे
हनुमान जी का जीवन श्रीराम और सीता माता की सेवा में समर्पित था। उन्होंने सीता माता की खोज, रामजी को संदेश देना, संजीवनी बूटी लाना, युद्ध में सहायता करना—इन सब कार्यों के माध्यम से श्रीराम के कार्य को सफल बनाया। हनुमान जी की भक्ति और सेवा-भावना के कारण ही वे 'रामदूत' कहलाए।
उपसंहार
इस श्लोक के माध्यम से भक्तों को यह संदेश मिलता है कि सच्ची भक्ति, साहस, बुद्धि और परिश्रम से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। हनुमान जी की तरह हमें भी अपने आराध्य के कार्य, समाज और धर्म के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करना चाहिए। हनुमान जी की आराधना से मनुष्य में शक्ति, बुद्धि और भक्ति का संचार होता है।
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